जोधपुर।
अदालत ने टिप्पणी की कि पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह कानून के अनुसार जांच करे, न कि सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति को अपमानित करे। कोर्ट ने इसे “पब्लिक शेमिंग” बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकारों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि गिरफ्तार व्यक्तियों से संबंधित पहले से प्रकाशित तस्वीरों और सामग्री को तुरंत हटाया जाए और भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई न की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि मीडिया ट्रायल और समाज में किसी व्यक्ति की छवि खराब करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है, खासकर तब, जब बाद में वह व्यक्ति निर्दोष पाया जाए।
यह टिप्पणी इस्लाम खान एवं अन्य बनाम राज्य सरकार मामले की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख भी तय की है और पुलिस से जवाब तलब किया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश न केवल पुलिस व्यवस्था बल्कि मीडिया रिपोर्टिंग के लिए भी एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश है, जिससे आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
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